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पेट में सूजन के क्या है लक्षण, कारण और घरेलू उपचार ?

पेट जोकि हमारे समस्त पाचन क्रिया के साथ जुड़ा होता है, अगर इसमें किसी भी तरह की समस्या आ जाए तो हमारे पूरे शरीर की कार्य करने की क्षमता अस्त-व्यस्त हो जाती है। इसके अलावा पेट का सूजन व्यक्ति में किस तरह की समस्या को उत्पन्न करता है, और कैसे इसके लक्षणों को जानकर हम घरेलू उपचार की मदद से पेट में सूजन की समस्या से निजात पा सकते है के बारे में आज के आर्टिकल में चर्चा करेंगे ;

पेट की सूजन क्या है ?

  • पेट की सूजन तब होती है जब पेट का क्षेत्र सामान्य से बड़ा होता है। इसे कभी-कभी एक विकृत पेट या फूला हुआ पेट के रूप में भी जाना जाता है। 
  • फूले हुए पेट के कई संभावित कारण होते हैं और यह एक सामान्य घटना है। अधिकांश लोग विभिन्न कारणों से किसी बिंदु पर सूजन का अनुभव करते है। 
  • इसके अलावा पेट सूजने पर ऐसा महसूस होता है कि पेट फैल गया है और खिंच गया है, जो असहज हो सकता है।

अगर आपके पेट में भी सूजन की समस्या बनी रहती है तो इसके लिए आपको लुधियाना में गैस्ट्रो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पेट में सूजन के कारण क्या है ?

  • वजन का बढ़ना या मोटापे की समस्या। 
  • पेट में द्रव का निर्माण होना। 
  • फाइबर में उच्च खाद्य पदार्थ खाने से आंतों में गैस। 
  • संवेदनशील आंत की बीमारी। 
  • आंशिक आंत्र में रुकावट। 
  • गर्भावस्था के कारण आदि।

पेट में सूजन के लक्षण क्या है ?

  • जी मिचलाने की समस्या का सामना करना। 
  • उल्टी होने की समस्या। 
  • भूख में कमी। 
  • सख्त मल का त्यागना। 
  • मल के कलर में बदलाव का होना। 
  • खून की उल्टी का होना आदि।

पेट में सूजन के लिए डॉक्टर के पास कब जाए ?

  • जब आपको भूख नहीं लगती हो। 
  • पुरानी या लगातार कब्ज, दस्त या उल्टी की समस्या। 
  • लगातार सूजन, गैस या सीने में जलन का होना। 
  • आपके मल में खून या बलगम का आना। 

कौन-से घरेलु उपायों की मदद से पेट के सूजन को कम किया जा सकता है ?

  • टहलें, क्योंकि शारीरिक गतिविधि आंतों को अधिक नियमित रूप से स्थानांतरित करने का कारण बन सकती है, जो अतिरिक्त गैस और मल को बाहर निकालने में मदद कर सकती है।  
  • अदरक में अविश्वसनीय गैस निष्कासन गुण होते हैं और ये अपच को बहुत जल्दी ठीक कर सकते है।
  • वही नींबू के रस के छींटे के साथ एक गिलास गर्म पानी पीने से आपको पेट की सूजन से काफी आसानी से छुटकारा मिल सकता है।
  • स्वास्थ्य पूरक के रूप में सेब के सिरके को सुबह-सुबह एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर दिन में एक बार पिया जा सकता है।
  • दही को हमेशा हाइपरएसिडिटी के लिए रिफ्रेशिंग फूड माना गया है। दही आंत में खराब बैक्टीरिया को प्रतिस्थापित करते है और पाचन में सुधार करते है।

अगर आपको पेट या आंत से जुडी किसी भी तरह की समस्या है तो आप लुधियाना में कोलोनोस्कोपी से अपनी जाँच करवाए।

पेट की सूजन से निजात दिलवाने के लिए बेस्ट हॉस्पिटल व सेंटर !

यदि आपके पेट या आंत में किसी भी तरह की सूजन आ गई है तो इससे बचाव के लिए आप लुधियाना गेस्ट्रो एन्ड गयने सेंटर का चयन जरूर करें। क्युकी पेट की समस्या को अगर शुरुआती दौर में ही ठीक कर लिया जाए तो गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष :

उम्मीद करते है आपको पता चल गया होगा की अगर पेट में सूजन आ जाए तो आपको किस तरीके से खुद का बचाव करना चाहिए।

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Health Hindi Pregnancy

हॉस्पिटल की कौन-सी 5 सुविधाएं आपकी डिलीवरी को बनाएगी सफल!

 गर्भवती होने के बाद जो डिलीवरी का समय होता है वो हर महिला व उसके परिवार जनो के लिए खुशी का मंजर होता है, इसलिए इस खुशी में किसी भी तरह की बाधा न आए इसके लिए आपको महिला के डिलीवरी से पहले ही हॉस्पिटल की जाँच पड़ताल कर लेनी चाहिए और जिन डॉक्टरों ने डिलीवरी करनी है उनके अनुभव के बारे में भी जानकारी हासिल करना चाहिए। इसके अलावा आज के लेख में हम बात करेंगे की डिलीवरी के दौरान इमरजेंसी के वक़्त हर हॉस्पिटल में कौन-सी पांच चीजे होना बहुत ही महत्वपूर्ण है ;

डिलीवरी से कितने दिन पहले हॉस्पिटल की जाँच करना शुरू करें !

  • जब आपको पता चल जाए की महिला के डिलीवरी को कुछ हफ्ते या महीने रह गए है तो आपको हॉस्पिटल की जाँच शुरू कर देनी चाहिए, और आपको इस बात का ख़ास ध्यान रखना है की आप उस ही हॉस्पिटल का चयन करें जहा वह सब सुविधाएं मौजूद हो जो डिलीवरी के बाद जच्चे और बच्चे दोनों को जरूरत होती है।

इसके अलावा डिलीवरी के दौरान या उससे पहले महिला को कोई परेशानी आ जाए तो इसके लिए महिला को बेस्ट गायनोलॉजिस्ट के सम्पर्क में आना चाहिए।

डिलीवरी के लिए हॉस्पिटल या नर्सिंग होम में कौन-सी पांच सुविधाएं मौजूद होनी चाहिए ?

  • अगर आप हॉस्पिटल चुनने जा रहें है, तो इसके लिए सबसे पहले आपको ये देखना चाहिए की हॉस्पिटल में “मेड‍िकल सुव‍िधा” है या नहीं, क्युकी हॉस्‍प‍िटल में सही मेड‍िकल सुव‍िधा ही जच्चे और बच्चे दोनों को सुरक्षित रख सकती है। इसके अलावा हॉस्‍प‍िटल में साफ-सफाई का प्रबंधन अच्छे से है या नहीं, इस बात का भी ध्यान रखें।
  • आपको हॉस्‍प‍िटल चुनने से पहले उस जगह की “मेड‍िकल टीम” के बारे में भी जानना चाह‍िए। क्युकि बहुत से ऐसे अस्‍पताल भी है, जहां डॉक्‍टर उतने ट्रेन्‍ड में नहीं होते, ज‍िसके चलते ड‍िलीवरी के समय कई तरह की समस्‍याओं का सामना महिलाओं को करना पड़ता है।
  • आप ज‍िस हॉस्‍प‍िटल का चयन करें उसमें इस बात का खास ध्यान रखे की वहां पर “एनआईसीयू” की फैस‍िल‍िटी जरूर हो, क्‍योंक‍ि जन्‍म के बाद नवजात श‍िशु में कई तरह की समस्‍याएं होती है, जैसे सांस लेने में द‍िक्‍कत, प्रीमैच्‍योर ड‍िलीवरी के कारण लो बर्थ वेट आद‍ि।
  • ड‍िलीवरी की स्‍थि‍त‍ि में “हॉस्‍प‍िटल की लोकेशन” बहुत ही ज्यादा मायने रखती है, क्‍योंक‍ि ड‍िलीवरी के समय क‍िसी भी वक़्त अस्‍पताल जाने की जरूरत पड़ सकती है। तो ऐसे में अगर अस्‍पताल दूर है तो आपको परेशानी हो सकती है। इसलिए जरूरी है की आप अपने आसपास के नर्स‍िंग होम और हॉस्‍प‍िटल के संपर्क में रहें।
  • हॉस्‍प‍िटल का चयन करने से पहले इस बात का ध्यान रखें की उस हॉस्पिटल में “हाई र‍िस्‍क प्रेगनेंसी” की सुव‍िधा जरूर होनी चाह‍िए। वही हाई र‍िस्‍क प्रेगनेंसी की स्‍थ‍ित‍ि में इमरजेंसी ब्‍लड की जरूरत पड़ सकती है इसके अलावा हाई र‍िस्‍क प्रेगनेंसी के वार्ड नॉर्मल वॉर्ड से बिल्कुल अलग होते है।

अगर आप उपरोक्त बातो का ध्यान रखे है, तो आपकी पेनलेस नार्मल डिलीवरी होने की संभावना और ज्यादा बढ़ जाती है।

सुझाव :

  • यदि आप डिलीवरी के लिए किसी अच्छे सेंटर या हॉस्पिटल का चयन कर रहें है तो इसके लिए आप लुधियाना गेस्ट्रो एन्ड गयने सेंटर का चयन कर सकते है। वही आपको बता दे की इस सेंटर में “हाई र‍िस्‍क प्रेगनेंसी वार्ड” और अन्य “वार्ड” भी मौजूद है।
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Gastric Problems Hindi Kartik Goyal

पेट का अच्छे से ध्यान रख कर कैसे बच सकते है, पेट की बीमारियों से ?

एक अच्छी पाचन क्रिया व स्वास्थ्य पेट का होना आज के समय में मुश्किल होता जा रहा है क्युकी लोगों के द्वारा स्वास्थ्य खान-पान पर ध्यान नहीं दिया जाता जिस वजह से उनके पेट में कई सारी परेशानियां जन्म ले लेती है, और पेट की अच्छी तरीके से सफाई न करने की वजह से व्यक्ति को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है, इसके अलावा पेट में जमी गंदगी की वजह से किस तरह की बीमारी उत्पन्न होती है और इन बीमारियों से कैसे हम खुद का बचाव कर सकते है इसके बारे में हम आज के लेख में बात करेंगे ;

पेट में जमी गंदगी क्या है ?

  • हमारे द्वारा जो खाना-खाया जाता है, और जब ये खाना हमारे मलाशय से नहीं निकल पाता, तो कोलोन में ही जमा हो जाता है।
  • कोलन, जिसे बड़ी आंत के रूप में भी जाना जाता है, वही कोलन पाचन तंत्र का एक हिस्सा है। 
  • आप जो भोजन खाते है वह पेट और छोटी आंत में अवशोषित होता है। कोलन शरीर के पानी को पुनः प्राप्त करने और बचे हुए भोजन में पोषक तत्वों को अवशोषित करने में मदद करता है। 
  • वही यदि आपका पेट ठीक प्रकार से साफ नहीं होता तो, आपको कोलोन इंफेक्शन होने का भी खतरा हो सकता है। 
  • इसके अलावा यह वेस्‍ट मटीरियल यदि लंबे समय तक पेट में पड़ा रहे तो टॉक्‍सिक हो सकता है और आपकी हेल्‍थ को नुकसान पहुंचा सकता है।

आपके पेट में गंदगी के कारण कई तरह की बीमारियां उत्पन्न हुई है या नहीं के बारे में जानने के लिए आपको लुधियाना में कोलोनोस्कोपी से अपनी जाँच जरूर करवानी चाहिए।

कोलन या बड़ी आंत साफ़ रहने के फायदे !

  • आपके समग्र मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार आता है।
  • प्रतिरक्षा प्रणाली के कामकाज में सुधार का आना।
  • पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है।

किन तरीको को अपनाकर पेट की गन्दगी को बाहर निकाला जा सकता है ?

  • एल्कोहल, धूम्रपान और कैफीन लेने से बचें।
  • पानी अधिक मात्रा में पिएं। इससे बॉडी हाइड्रेट रहेगी और पेट भी आसानी से साफ होगा।
  • खाना खाने के बाद वॉक जरूर करें।
  • खाना खाते ही लेटने या बैठने से बचे। 
  • रोज सुबह खाली पेट गुनगुना पानी से गंदगी को साफ किया जा सकता है।
  • सेब का जूस पिए। 
  • लेमन को एक ग्लास हल्के गर्म पानी में गर्म करें और उसमे एक चम्मच शहद और एक चम्मच नींबू का रस डाल कर पीने से पेट की समस्या से आराम मिलेगा।
  • दही का सेवन करने से भी पाचन की समस्‍या दुरुस्‍त होती है।

उपरोक्त तरीकों को अपनाने के बाद भी अगर आपके पेट में किसी न किसी तरह की परेशानी ने जन्म ले लिया है तो इससे बचाव के लिए आपको गैस्ट्रो डॉक्टर लुधियाना का चयन करना चाहिए।

पेट की समस्या से निजात पाने के लिए बेस्ट हॉस्पिटल या सेंटर ?

  • अगर आपके पेट की सामान्य समस्या ने किसी भयंकर रोग का रूप धारण कर लिया है तो इससे बचाव के लिए आपको लुधियाना गेस्ट्रो एन्ड गयने सेंटर का चयन करना चाहिए। क्युकी इस हॉस्पिटल में अनुभवी डॉक्टरों के द्वारा आधुनिक उपकरणों की मदद से मरीजों का इलाज किया जाता है। 

निष्कर्ष :

पेट व पाचन क्रिया का हमारे शरीर में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है क्युकि इनके साथ ही हमारे शरीर का पूरा सिस्टम चलता है इसलिए अगर इनमे किसी भी तरह की परेशानी आ जाए तो समय रहते आपको किसी बेहतरीन डॉक्टर का चयन करना चाहिए।

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Health Hindi Shuchita Batra Weight Loss

डिलीवरी के बाद बढ़े हुए वजन को कैसे किया जा सकता है कम ?

डिलीवरी के बाद कैसे वजन को घटाएं इसको लेकर हर महिला के मन में ये सवाल गूंजता रहता है। इसके अलावा अक्सर आपने देखा होगा की जिन महिलाओं की डिलीवरी होती है उनके पेट का निचला हिस्सा लटक जाता है जिसके कारण उन्हें कई बार काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है

तो वही कुछ महिलाएं इस समस्या से निपटने के लिए मालिश का सहारा लेती है, तो कोई डाइटिंग करके अपने आप को इस समस्या से छुटकारा दिलवाना चाहती है पर अब आपको तरह-तरह के उपायों को करने की जरूरत नहीं है बल्कि आपको हम कुछ उपाय बताएंगे जिसका सहारा लेकर आप इस समस्या से खुद का बचाव कर सकती है, तो चलते है और वजन कम करने के आर्टिकल की शुरुआत करते है ;

डिलीवरी के बाद बढ़े हुए वजन को कैसे करें कम ?

  • डिलीवरी के बाद महिलाओं को भूख अधिक लगती है जिस वजह से वह कुछ भी खाना शुरू कर देती हैं। ऐसे में जरूरी है कि भूख लगने पर केवल हेल्दी खाने को प्राथमिकता दे साथ ही क्रैश डाइट का सहारा न लें। वही अगर आप हेल्दी चीजे खाते है तो आप दिन की केवल 500 कैलोरी कम करके एक हफ्ते में आधा किलोग्राम वजन कम कर सकती है।
  • आजकल ज्यादातर महिलाएं आत्म निर्भर (सेल्फ डिपेंडेंट) होने की वजह से वह आफिस के काम में व्यस्त रहती हैं। जिस कारण उन्हें थोड़ी-थोड़ी देर में बच्चे को ब्रेस्टफीड कराने का समय नहीं मिल पाता, जिसका नतीजा वेट गेन या ब्रेस्ट प्रॉब्लम हो सकती है। इसलिए जो महिलाएं डिलीवरी के बाद अपना वेट कम करना चाहती हैं तो उन्हें अपने बच्चे को ब्रेस्टफीड कराना चाहिए। 
  • डिलीवरी के बाद आपको ध्यान रखना है कि आप अधिक कैलोरी वाला भोजन न करें। 
  • दिनभर डिलीवरी के बाद महिलाओं को एक्टिव रहना चाहिए और एक्टिव रहने के लिए आप दिनभर में जितना काम खुद से कर पाएं उतना करें। डिलीवरी के बाद शरीर कमजोर हो जाता है इसलिए आपके शरीर में जितना बल है उसके हिसाब से आप रोजाना 10 से 15 मिनट का वॉक जरूर करें। वही अगर आपको नहीं पता चल रहा है कि वजन कम करने के लिए किन बातो का ध्यान रखना चाहिए तो इसके लिए आपको लुधियाना में गायनेकोलॉजिस्ट का चयन करना चाहिए।

डिलीवरी के बाद किन बातों का रखें ध्यान ?

  • आमतौर पर डिलीवरी के बाद वजन कम करने के लिए खाने के साथ-साथ हेल्दी स्नैक्स को लेते रहें।
  • दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी जरूर पिएं। 
  • अपने खानपान में एडेड शुगर और सोडा कम ले। 
  • फलों के जूस पीने के बजाय सादे फल (Fruits) खाने की कोशिश करें। 
  • तला-भुना खाने से बिल्कुल परहेज करें। तो वही तला-भुना खाने से अगर आपके पेट में दिक्कत हो जाती है तो इसके लिए आपको गैस्ट्रो डॉक्टर लुधियाना से मिलना चाहिए।

सुझाव :

अगर डिलीवरी के बाद आपका वजन भी बहुत ज्यादा बढ़ गया है तो इससे निजात पाने के लिए आपको उपरोक्त बातों को ध्यान में रखना है और इसके लिए आप लुधियाना गैस्ट्रो एन्ड गयने सेंटर से सम्पर्क करें और यहाँ के डॉक्टरों के द्वारा बताए गए वजन कम करने वाले नियमों के बारें में अच्छे से जानकारी हासिल करें।  

 

निष्कर्ष :

उम्मीद करते है कि आपको पता चल गया होगा की कैसे डिलीवरी के बाद आप अपने वजन को कम कर सकते है पर इन उपायों या किसी भी तरह की दवाइयों को प्रयोग में लाने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह ले।

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Endoscopy Gastroenterology Hindi Kartik Goyal

गैस्ट्रिक समस्या से आप भी है परेशान तो आजमाए इसके सहायक प्रक्रिया व उपचार ?

एक मनुष्य का पूरा शरीर उसके सही पाचन क्रिया पर निर्भर करता है। अगर सोचो पेट या पाचन क्रिया ही न सही हो व्यक्ति की, और उसको गैस्ट्रो, अपच जैसी परेशानी का सामना करना पड़ जाए तो। साथ में ही हम आज के इस लेख में इसी के बारे में जानकारी आपके सामने प्रस्तुत करेंगे की कैसे गैस्ट्रो की समस्या उत्पन होने पर हम इससे कैसे निजात पा सकते है।

गैस्ट्रो की समस्या क्या है ?

गैस्ट्रो की समस्या के बारे में हम निम्न में बात करेंगे ;

गैस्ट्रिक की समस्या आपके ऊपरी पेट में जलन या दर्द से शुरू होता है और कभी-कभी अन्नप्रणाली में भी होता है, जो खाने से या तो खराब या बेहतर हो सकता है। मतली, उल्टी, या खाने के बाद आपके पेट के ऊपरी हिस्से में भरा हुआ महसूस होना, पेट में भारीपन या थकान का होना गैस्ट्रिक दर्द के साथ ही शामिल हैं।

गैस्ट्रिक की समस्या पैदा होने पर कौन-सी बीमारी उत्पन होती है ?

इस समस्या के उत्पन होने पर निम्नलिखित समस्या उत्पन हो सकती है, जैसे;

  • कुछ एक्सपर्ट्स का मानना हैं कि गैस की समस्या बनने पर बहुत सी बीमारियां उत्पन होती है जैसे, बवासीर, वजन का कम होना, कब्ज की समस्या का उत्पन होना, डायरिया और उल्टी या मतली जैसी गंभीर समस्याओं के कुछ कारण बन सकते है इस बीमारी के।

गैस्ट्रो के दौरान यदि बीमारियां उत्पन हो जाए, तो आपको गैस्ट्रो डॉक्टर लुधियाना के संपर्क में आना चाहिए।

गैस्ट्रो की समस्या के क्या कारण है ?

इसके कारणों को जान कर आप इस समस्या का अंदाजा लगा सकते है, जैसे ;

  • अगर आप कुछ भी पीते और चबाते है, तो उस समय हवा को साथ में निगल जाना।
  • गैस बनाने वाले पदार्थों का सेवन करना।
  • आंतों में संक्रमण जैसे पाचन संबंधी समस्याएं।
  • कुछ दवाएं भी गैस्ट्रो के कारण को दर्शाती है।
  • बैक्टीरियल या वायरस संक्रमण।

गैस्ट्रिक समस्याओं की कैसे करे पहचान ?

निम्न तरह के टेस्ट करवा कर ;

  • इमेजिंग परीक्षण करवाना।
  • एंडोस्कोपी से जांच करवाना।
  • रक्त परीक्षण को करवाना।
  • श्वास टेस्ट को करवाना।

यदि आप गैस्ट्रो समस्या की जाँच करवाना चाहती है, वो भी एंडोस्कोपी से तो पंजाब में एंडोस्कोपी की कीमत के बारे में एक बार जरूर से जानना।

उपचार क्या है गैस्ट्रिक बीमारी से निजात पाने का ?

इसका उपचार डॉक्टर मरीज़ के हिसाब से करता है, जिसको हम निम्न में प्रस्तुत कर रहे है ;

  • आंतों की गैस के लिए उपचार की पहली पंक्ति दर्द से राहत देना है। आपका स्वास्थ्य सेवा प्रदाता किसी भी उपचार की पेशकश करने से पहले आपके स्वास्थ्य का विश्लेषण करेगा और आपकी समग्र स्थिति की जांच अच्छे से करेगा।
  • आपका डॉक्टर गैस समस्या के मूल कारण का इलाज करने के लिए एक व्यक्तिगत उपचार योजना तैयार करेगा। जिनमे से पहला है-
  • दवाई का उपयोग करना।
  • अंतर्निहित पाचन समस्या का उपचार करना।
  • जीवनशैली में बदलाव का आना।
  • इसके इलावा यदि उपचार बीच में छोड़ दिया जाए, तो आंतों में गैस की जटिलताओं के कई कारण बन सकते है। इनमें सीने में दर्द, हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ना और अपच संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ना शामिल है।

आप भी अगर पेट के अंदरूनी समस्या से परेशान है, तो इसका उपचार लुधियाना गैस्ट्रो एन्ड गयने सेंटर से जरूर से शुरू करवाए।

निष्कर्ष :

पेट की समस्या कोई मामूली समस्या नहीं है। इसलिए कोई भी परेशानी यदि आपको उपरोक्त में से आपमें नज़र आए तो कृपया इसे नज़रअंदाज़ न करे।

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Hindi Premature Birth Shuchita Batra

Premature Birth: समय से पहले प्रीमैच्‍योर डिलीवरी को रोकने में जाने कैसे सहायक हैं इसके इलाज

Premature Birth: प्रीमैच्‍योर लेबर डिलीवरी क्या हैं ?

  • कुछ महिलाएं 9 महीने या प्रेग्‍नेंसी के 37वें हफ्ते से पहले ही बच्‍चे को जन्‍म दे देती हैं। इस स्थिति को प्रीमैच्योर लेबर (Premature Labor) कहा जाता है। यानि की डिलीवरी डेट से 3 हफ्ते पहले प्रसव होने को प्रीमैच्‍योर लेबर कहते हैं।
  • तो वहीं जब बच्चा बहुत जल्दी पैदा होता है, यानि गर्भावस्था के 37 सप्ताह पूरे होने से पहले। जितनी जल्दी बच्चा पैदा होता है, मृत्यु या गंभीर विकलांगता का जोखिम ऐसे बच्चे में ज्यादा पाया जाता है। 

कारण क्या है प्रीमैच्‍योर लेबर डिलीवरी के ?

प्रीमैच्‍योर डिलीवरी के कई कारण हो सकते हैं, जिनका प्रस्तुतिकरण हम निम्न में करेंगे..,

  • 18 से कम या 35 वर्ष से ज्यादा उम्र के बाद की गर्भावस्था का होना। 
  • पिछली गर्भावस्था में प्रीमैच्योर डिलीवरी का होना। 
  • गर्भ में जुड़वां या उससे ज्यादा भ्रूण का बनना। 
  • मधुमेह की समस्या। 
  • उच्च रक्तचाप। 
  • पोषक तत्वों में कमी। 
  • किसी प्रकार का संक्रमण जैसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन। 
  • आनुवंशिक प्रभाव भी इसका एक महत्वपूर्ण कारण माना जाता हैं। 

कारण जानने के बाद यदि आपको समय से पहले प्रसव होने वाला हैं, तो पेनलेस नार्मल डिलीवरी आपके लिए ऐसी अवस्था में सहायक सिद्ध हो सकती हैं। 

प्रीमैच्‍योर लेबर डिलीवरी के संकेत क्या हैं ?

इसके बहुत से संकेत हैं, जिनमे से कुछ को हम निम्न में प्रस्तुत कर रहें हैं..,

  • अचानक से पानी की थैली का फटना। 
  • वेजाइनल डिस्चार्ज। 
  • पेट के निचले हिस्से में ऐंठन। 
  • मतली और उल्टी। 
  • पेट में संकुचन। 
  • पीठ में दर्द। 
  • डायरिया या फिर उसके बिना भी पेट में तेज दर्द का होना।

यदि आपको प्रेगनेंसी के दौरान उपरोक्त संकेत दिखाई दे तो किसी अच्छे गायनोलॉजिस्ट का बिना समय बर्बाद किए चुनाव करें।

इलाज क्या हैं समय से पहले प्रसव या प्रीमैच्‍योर डिलीवरी को रोकने का ?

इसके कई इलाज हैं, जिससे की प्रीमैच्‍योर डिलीवरी को रोकने में हम सहायक सिद्ध हो सकते हैं, जैसे..,

  • यदि आपमें प्रीमैच्‍योर डिलीवरी का खतरा बनता हैं तो डॉक्टर इलाज के दौरान आपको हॉर्मोन ट्रीटमेंट देते हैं। जिससे की गर्भावस्था के 16वें से 37वें हफ्ते तक महिला के शरीर में प्रोजेस्ट्रोन नाम का हॉर्मोन स्थापित होता है।
  • जिन महिलाओं का गर्भाशय ग्रीवा कमजोर होने लगता है, उन्हें सर्वाइकल सेरेक्लेज ट्रीटमेंट दिया जाता हैं। 
  • समय से पहले प्रसव किसी संक्रमण की वजह से भी हो सकता है। तो ऐसे में डॉक्टर आपको एंटीबायोटिक लेने की सलाह भी दे सकते हैं।
  • स्टेरॉयड का इलाज गर्भाशय में डॉक्टर इसलिए करते है ताकि समय से पहले जन्म लेना वाला बच्चा सुरक्षित रह सकें। 
  • कुछ अनुभवियों का कहना हैं कि टोकोलाइसिस की दवाई के सेवन से प्रीमैच्‍योर डिलीवरी के खतरे को कुछ समय के लिए टाला जा सकता हैं। पर इस पर रिसर्च अभी चल ही रही हैं।

यदि आप समय से पहले प्रीमैच्‍योर की समस्या से निजात पाना चाहते हैं। तो आप किसी अच्छे गायनी हॉस्पिटल का चुनाव करें। इसके इलावा आप लुधियाना गैस्ट्रो गायनी सेंटर का चुनाव भी कर सकते हैं और इस समस्या के बारे में यहाँ के अनुभवी डॉक्टर कार्तिक गोयल और डॉक्टर शुचिता बत्रा से भी सलाह ले सकते हैं।

निष्कर्ष :

यदि आप समय से पहले होने वाले प्रीमैच्‍योर लेबर के संकेतो के बारे में जान चुके हैं। तो बिना समय गवाए किसी अच्छे डॉक्टर का चुनाव करके इस परेशानी से हल पाए और अपनी डिलीवरी को समय पर करवाए। बस इसमें आपको थोड़ी सी सतर्कता बरतने की जरूरत हैं ताकि बाद में आपको किसी भी समस्या का सामना न करना पड़े।