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गर्भवती महिलाओं को टाइप 1 डायबिटीज में किस तरह की सावधानियों को बरतना चाहिए !

गर्भावस्था एक ऐसा पड़ाव है हर महिला की ज़िन्दगी में की इस पड़ाव से तो हर महिला होकर गुजरती ही है, पर गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को कई तरह की समस्या का भी सामना करना पड़ सकता है, तो वहीं गर्भावस्था में कई महिलाएं टाइप 1 डायबिटीज की समस्या का भी सामना करती है, तो चलिए जानते है की इस तरह की समस्या से कैसे वो खुद का बचाव कर सकती है, और साथ ही किन बातों का उन्हे इस दौरान खास ध्यान रखना चाहिए;

महिलाओं में डायबिटीज की समस्या क्या है ?

  • डायबिटीज लंबे समय तक चलने वाली एक गंभीर स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या है। वहीं इस बीमारी को ठीक करना मुश्किल है, लेकिन इसके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। वहीं महिलाओं में डायबिटीज का असर प्रेग्‍नेंसी पर भी देखने को मिलता है। 
  • इसके अलावा अगर माँ डायबिटीज की बीमारी से परेशान है, तो इसका नुकसान उनके बच्‍चे को भी उठाना पड़ सकता है।
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गर्भवती महिलाओं में टाइप 1 डायबिटीज के क्या लक्षणा नज़र आते है ?

  • असामान्य प्यास का लगना। 
  • लगातार पेशाब का आना। 
  • पेशाब में शुगर की मात्रा का बढ़ना। 
  • थकान या उल्टी की समस्या। 
  • धुंधली दृष्टि की समस्या।
  • योनि में संक्रमण का भय। 
  • मूत्राशय और त्वचा में संक्रमण की समस्या का सामना करना।

अगर आपमें भी गर्भावस्था के दौरान टाइप 1 डायबिटीज के इस तरह के लक्षण नज़र आए या किसी भी तरह की समस्या नज़र आए तो इससे बचाव के लिए आपको बेस्ट गायनोलॉजिस्ट के संपर्क में आना चाहिए। 

प्रेग्नेंसी के दौरान डायबिटीज से ग्रस्त महिलाएं किन बातों का रखें ध्यान !

  • अगर ​डायबिटीज से ग्रस्त महिलाओं की डिलीवरी होती है, तो उन्हे जन्‍म के समय बच्चे के अधिक वजन के होने पर खास ध्यान रखना चाहिए। 
  • टाइप 1 डायबिटीज से ग्रस्‍त मांओं के बच्‍चों में जन्‍मजात बीमारियां या विकार होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। हार्ट डिजीज, हाथ-पैरों में विकलांगता और रीढ़ की हड्डी में कोई विकार हो सकता है। इसके अतिरिक्‍त शिशु के विकास और नसों से संबंधित कई समस्‍या भी आ सकती है।
  • डायबिटीक मां के शिशु में हाइपोग्लाइसीमिया या लो ब्‍लड ग्‍लूकोज भी हो सकता है। जन्‍म से पहले ब्‍लड शुगर को कंट्रोल करने के लिए प्रयास करने की वजह से ऐसा हो सकता है। इसमें बच्‍चे का ब्‍लड शुगर तेजी से घटता है और ब्रेन डैमेज होने जैसी जटिलताएं आ सकती है।
  • डायबिटीज से ग्रस्‍त मां के नवजात शिशु में ‘रेस्पिरेट्री डिस्‍ट्रस सिंड्रोम’ (सांस लेने में तकलीफ का सामना करना) की समस्या हो सकती है। डायबिटीज भ्रूण के फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है और फेफड़ों के विकास को धीमा कर सकता है। इससे शिशु को रेस्पिरेट्री डिस्‍ट्रेस सिंड्रोम हो सकता है। 
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अगर आप अपनी गर्भावस्था की अवधि पूरी करने के बाद पेनलेस नार्मल डिलीवरी की चाहत रखती है तो इसके लिए आपको डायबिटीज के शुरुआती लक्षणों को जानकर इसका इलाज जरूर करवाना चाहिए।

टाइप 1 डायबिटीज से ग्रस्त महिलाएं कैसे रखें अपने खाने का खास ध्यान ?

  • हर दिन लगातार मात्रा में भोजन करने और निर्देशानुसार इंसुलिन लेने से रक्त शर्करा के स्तर में काफी सुधार हो सकता है। यह मधुमेह से संबंधित जटिलताओं, जैसे कोरोनरी धमनी रोग, गुर्दे और नेत्र रोग, और तंत्रिका क्षति के जोखिम को भी कम कर सकता है। 
  • इसके अलावा, ये उपाय शरीर के वजन प्रबंधन पर भी प्रभाव डालते है।
  • हाई शुगर और तली भुनी चीजों का सेवन करने से आपको बचना चाहिए। 
  • प्रयाप्त मात्रा में आपको सब्जियों और फलों का सेवन करना चाहिए।
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सुझाव :

टाइप 1 डायबिटीज से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को लुधियाना गैस्ट्रो एन्ड गयने सेंटर का चयन करना चाहिए। और इस दौरान उन्हें हर तरह की समस्या से बचाव के लिए डॉक्टर के संपर्क में आना चाहिए।

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