गर्भावस्था के दौरान और गर्भावस्था के बाद में महिलाओं को अनगिनत मुसीबतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें शारीरिक और मानसिक बदलाव भी शामिल होते हैं। असल में, गर्भावस्था एक महिला के लिए वो खूबसूरत पल होता है, जिसके वह सपने पहले से ही अपने मन में संजोकर रखती है। वह इसके लिए कई तरह की समस्याओं से भी लड़ने के लिए त्यार हो जाती है। यह तो सच है, कि गर्भावस्था के दौरान एक महिला को कई ऐसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसकी वजह से उसके शरीर में कई तरह के बदलाव देखे जा सकते हैं। वहीं जब बात एक महिला की डिलीवरी की आती है, मतलब कि जब एक गर्भवती महिला एक बच्चे को जनम देने वाली होती है या फिर उसको जनम दे रही होती है, तो वह पल एक महिला के लिए काफी ज्यादा महत्वपूर्ण और खुशियों से भरा हुआ होता है। वह इस दौरान उन सभी चीजों के बारे में सोच लेती है, जो उसके बच्चे के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद साबित होते हैं। आम तौर पर, इस दौरान जब वह अपने बच्चे को गोद में लेती है, तो वह अपने आप को कंट्रोल नहीं कर पाती है और अपने बच्चे को खूब सारा प्यार करने लग जाती है। असल में, यह पल एक औरत की ज़िंदगी की नई शुरुआत का होता है, जो उसके जीवन में खुशियों की बौछार ले आता है।
दरअसल, यह हम आपको पहले भी बता चुके हैं, कि एक गर्भवती महिला को न केवल गर्भावस्था के दौरान, बल्कि डिलीवरी के बाद भी बहुत सी ऐसी तकलीफों से गुजरना पड़ता है, जिसकी वजह से उसको कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वैसे तो, डिलीवरी के बाद महिलाओं को कई तरह की शारीरिक और मानसिक दिक्क्तों से गुजरना पड़ता है, जिसमें से बवासीर की समस्या होना काफी ज्यादा आम होता है। ऐसा बहुत बार देखने को मिलता है, कि डिलीवरी हम में से बहुत सी महिआएं बवासीर जैसी समस्या को काफी ज्यादा आम समझ लेती हैं और इस समस्या में दिखाई देने वाले लक्षणों पर महत्वपूर्ण ध्यान नहीं देती हैं, जिसकी वजह से उन को आगे चलकर कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यहां तक कि अगर इस समस्या पर ध्यान न दिया जाये, तो ये समस्या आगे चलकर अपना गंभीर रूप धारण कर लेती है, जो काफी परेशानी को खड़ा कर देती है। इसी उलझन
में फंसी कई महिलाएं जानना चाहती हैं, आखिर डिलीवरी के बाद उनको बवासीर जैसी समस्या क्यों इतनी ज्यादा बढ़ जाती है? आपका इसी सवाल का जवाब देते हुए डॉक्टर का कहना है, कि हार्मोनल बदलाव, पेल्विक ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ना और डिलीवरी के दौरान काफी ज्यादा जोर लगाना जैसे कारणों की वजह से डिलीवरी के बाद एक महिला को बवासीर जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है। आइये इस लेख के माध्यम से इस के बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
डिलीवरी के बाद महिलाओं में बवासीर की समस्या क्यों बढ़ जाती है?
दरअसल, गर्भावस्था के दौरान और डिलीवरी के बाद में महिलाओं को अनगिनत समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसमें बवासीर की समस्या होना बहुत ही ज्यादा आम मानी जाती है। महिलाओं में डिलीवरी के बाद बवासीर की समस्या होने के कुछ कारण निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि
- हार्मोनल बदलाव होना
हार्मोनल बदलाव के कारण महिलाओं में डिलीवरी के बाद बवासीर की समस्या हो सकती है। ऐसे में, महिलाओं में प्रोजेस्टेरोन हार्मोन बढ़ता है और शरीर की आंतों की मसल्स रिलैक्स हो जाती हैं, जिससे कि मल त्याग की प्रक्रिया काफी ज्यादा धीमी हो जाती है और कब्ज जैसी समस्या का निर्माण होता है और यह बवासीर जैसी समस्या का एक बहुत बड़ा कारण बनता है।
- पेल्विक रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ना
यह सभी जानते हैं, कि गर्भावस्था के दौरान एक महिला के गर्भाशय का आकार धीरे-धीरे बढ़ जाता है, जिससे कि मलद्वार क्षेत्र की नसों पर काफी ज्यादा दबाव पड़ता है। इसके कारण महिला को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसका प्रभाव पेट के निचले हिस्से पर भी पड़ता है, जिसकी वजह से एक महिला के शरीर में खून का संचार काफी ज्यादा धीमा हो जाता है और गुदा के आस-पास की नसें दबाव केकारण फूलने लग जाती हैं। इससे न केवल पेट साफ होने में काफी दिक्कत होती है, बल्कि इसकी वजह से एक महिला धीरे-धीरे बवासीर की बीमारी का शिकार हो जाती है। ऐसे में, एक महिला को मल त्याग करते वक्त काफी ज्यादा दर्द और साथ में खून निकलने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
डिलीवरी के बाद बवासीर की समस्या से कैसे बचा जा सकता है?
अगर आप डिलीवरी के बाद वाली समस्या यानी कि बवासीर से अपना बचाव करना चाहते हैं, तो आप इसके लिए निम्नलिखित उपायों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जैसे कि
- भोजन करने का एक समय तय करें और केवल तय किए गए समय पर ही भोजन का सेवन करें।
- इस तरह की समस्या से बचने के लिए दिन में खूब पानी पीना काफी ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। रोजाना कम से कम 8 से 10 गिलास पानी के जरूर पिएं।
निष्कर्ष: गर्भावस्था और प्रसव के बाद बवासीर की समस्या होना आम होता है। पर, इसे नज़रअंदाज करना सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं होता है। हार्मोनल बदलाव, पेल्विक ब्लड वेसल्स पर दबाव पड़ना और डिलीवरी के दौरान काफी ज्यादा जोर लगाना जैसे कारणों के कारण ही महिलाओं में बवासीर की समस्या काफी ज्यादा बढ़ जाती है। अगर वक्त रहते बवासीर की समस्या की पहचान कर ली जाए, तो इसे कंट्रोल किया जा सकता है। नहीं तो, कई मामलों में सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। मिनिमली इनवेसिव और लेज़र-बेस्ड जैसे तरीकों से बवासीर का इलाज सही तरीके से हो सकता है। इस के बारे में ज्यादा जानने के लिए और गर्भावस्था के दौरान या फिर बाद में होने वाली किसी भी समस्या का समाधान पाने के लिए आप आज ही अमेरिटस हॉस्पिटल के विशेषज्ञों से संपर्क कर सकती हैं।
