महिलाओं के लिए गर्भावस्था का समय एक सुहाना पल होता है, जिसमें वह अपने आने वाले बच्चे को महसूस करती है, उनकी हर हरकतों को महसूस करती है। इसी के चलते उनको इस दौरान कई तरह की समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है, जिसमें कि उनके शरीर में कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। दरअसल, इस 9 महीने की प्रेगनेंसी में महिलाओं के जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं। ऐसे में, एक माँ की कोख में पल रहे बच्चे का विकास पूरी तरीके से होने के लिए कम से कम 9 महीने तक का समय लगता है। इसलिए, प्रेगनेंसी का समय एक प्राकृतिक प्रक्रिया मानी जाती है। पर, ऐसे में कुछ महिलाओं को प्रीमेच्योर डिलीवरी का भी सामना करना पड़ता है, जिसमें समय से पहले बच्चा का जनम हो जाता है। आम तौर पर, यह स्थिति हर माता-पिता के लिए एक चिंता का विषय होती है, क्योंकि इसमें बच्चे की देखभाल आम बच्चों की तुलना में काफी ज्यादा करनी होती है, क्योंकि इस दौरान उनके अंग पूरी तरीके से विकसित नहीं हुए होते हैं। इस तरह की स्थिति में जब कोई बच्चा समय से पहले जन्म ले लेता है, तो ऐसे में उस बच्चे को कई कई दिनों या फिर महीनों तक आईसीयू में रखा जाता है, जो माता पिता के लिए काफी दर्द भरी स्थिति होती है। गर्भावस्था के दौरान प्रीमेच्योर डिलीवरी कई कारणों से हो सकती है, जिसमें सबसे पहले गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य शामिल होता है। इसके अलावा, गर्भाशय या फिर सर्विक्स की कमजोरी होना, मल्टीपल प्रेगनेंसी और खराब लाइफस्टाइल होना जैसे कई कारण शामिल हो सकते हैं। गंभीर स्थिति होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। आइये इस लेख के माध्यम से इसके बारे में इस के डॉक्टर से और विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।
आखिर किन कारणों की वजह से समय से पहले डिलीवरी हो जाती है?
वैसे तो, समय से पहले बच्चे का जनम होने के कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, पर इसमें से कुछ निम्नलिखित अनुसार हो सकते हैं, जैसे कि
- गर्भवती महिलाओं का स्वास्थ्य ठीक न होना
दरअसल, कई बार गर्भवती महिलाओं की सेहत ठीक न होने की वजह से डॉक्टरों को प्रीटर्म डिलीवरी करनी पड़ सकती है। इंफेक्शन, हाई ब्लड प्रेशर या फिर प्रीक्लेम्पसिया, डायबिटीज और प्लेसेंटा जैसी कुछ मेडिकल स्थितियों की वजह से प्रीमेच्योर डिलीवरी को अंजाम दिया जाता है।
- मल्टीपल प्रेगनेंसी होना
दरअसल, अगर किसी महिला के गर्भ में एक से ज्यादा बच्चे पल रहे हैं, तो ऐसे में प्रीमैच्योर डिलीवरी का खतरा काफी ज्यादा बढ़ सकता है। ऐसे में, दबाव बढ़ जाता है।
समय से पहले बच्चे का जन्म होने के कुछ अन्य कारण!
- पहले कोई प्रीमैच्योर डिलीवरी हो चुकी होना।
- गर्भावस्था के दौरान पर्याप्त देखभाल में कमी होना।
- महिला की बहुत कम या फिर ज्यादा उम्र होना।
प्रीमैच्योर डिलीवरी से कैसे बचाव किया जा सकता है?
दरअसल, डॉक्टर का मानना है, कि प्रीमैच्योर डिलीवरी से पूरी तरीके से बचाव नहीं किया जा सकता है, पर सही देखभाल और पोषण से इस के खतरे को कम किया जा सकता है। जैसे कि
- नियमित जनम से पहले की जांच करवाते रहना।
- अपनी डाइट में संतुलित और पौष्टिक आहार को शामिल करना।
- रोजाना पर्याप्त रूप से नींद लेना।
- तनाव को कम करना।
- रोजाना योग या फिर मेडिटेशन को करना।
निष्कर्ष : दरअसल, गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान ऐसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उनके शरीर में कई तरह के बदलाव आ जाते हैं। ऐसे में, कई महिलाओं को प्रीमेच्योर डिलीवरी का भी सामना करना पड़ सकता है, जो माता और पिता दोनों के लिए एक चिंता का विषय होता है। इस तरह जनम लेने वाले बच्चे की ख़ास देखभाल करनी पड़ती है, क्योकि इस दौरान उसके शारीरक अंग पूरी तरीके से विकसित नहीं हुए होते हैं। प्रीमेच्योर डिलीवरी होने कारण एक माँ का स्वास्थ्य भी हो सकता है। इसके अलावा, मल्टीपल प्रेगनेंसी और खराब लाइफस्टाइल की वजह से भी प्रीमैच्योर डिलीवरी हो सकती है। प्रीमेच्योर डिलीवरी से बचने के लिए आप इस लेख में बताए गए टिप्स को फॉलो कर सकते हैं। गर्भावस्था से जुड़ी गंभीर समस्या होने पर आप तुरंत अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं। इसके बारे में ज्यादा जानकारी प्राप्त करने के लिए और गर्भावस्था से जुड़ी किसी भी तरह की समस्या का तुरंत समाधान पाने के लिए आप आज ही अमेरिटस हॉस्पिटल में जाकर इसके विशेषज्ञों से इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1. प्रीमैच्योर डिलीवरी क्या होती है?
दरअसल, डॉक्टर के अनुसार प्रीमैच्योर डिलीवरी उसे कहा जाता है, जिस में बच्चा 37 सप्ताह से पहले ही जन्म ले लेता है। चूँकि इस वक्त इस तरह जनम लेने वाले बच्चों के अंग पूरी तरीके से विकसित नहीं हुए होते हैं, तो इसलिए इन बच्चों की विशेष देखभाल करने की काफी जरूरत पड़ती है।
प्रश्न 2. गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को किन बातों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है?
दरअसल, गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को बहुत सी बातों का ध्यान रखने की जरूरत पड़ती है, जिसमें खान-पीन और पोषण का ध्यान रखना, पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करना, नियमित जांच करना, व्यायाम और विश्राम का अच्छे से ख्याल रखना, धूम्रपान, शराब, और अधपकी मछली या फिर मांस के सेवन से बचना, कैफीन के सेवन से अपना बचाव करना, तनावमुक्त रहना और पालतू बिल्लियों और उनके मल के सीधे संपर्क में आने से बचना शामिल हो सकता है।
प्रश्न 3. तनाव को दूर करने के लिए क्या करें?
तनाव को दूर करने के लिए आप हर दिन कहीं न कहीं टहलना, योग करना, गहरी सांस लेना और 10 से 15 मिनट का मौन धारण करना, स्वस्थ जीवन शैली को अपनाना, दोस्तों या फिर परिवार के साथ समय बिताना, हर दिन अच्छी बातों को सोचना और दिमाग को शांत करने के लिए संगीत को सुनना जैसे कई तरीकों को अपना सकते हैं। इससे दिमाग शांत और खुश रहता है।
